Friday, September 16, 2011

subah

सुबह शब्द अपने आप में अगिनित विचारो का एक पुंज नए दिन की शरुआत में सुंदर सपनों के साथ प्रभात वेला में अनोखी घटा बिखेरे हुए चारो और चिरियो की चय चय में पेढ़ो की हरयाली में सूर्य की लाली की किरण के साथ इस भू पर अपनी छटा भिखेर कर व्यक्ति की जिंदगी में नए ताजगी के साथ दिन की पहल करता हुआ सर्वशक्तिमान को नमन करता हुआ अपने को नया पता है . कुदरत अपने आप में बेमिसाल है ,उस परवरदिगार की रचना है जिसके कण कण में वो समाया हुआ है जिसे देख इंसान बार बार हेरान होता है और उसको नमन करता है और जुबा से अनायास शब्द फूट परते है "वाह" .सुबह सुहानी सुबह में व्यक्ति चल परता है नए दिन की असीम अशाओ के साथ ,अपने सपनों के साथ ,परिवार की खुशियों के लिए ,देश के लिए ,समाज के लिए ,सपनो को पूरा करने के लिए ,यही जिंदगी है यह ही जिंदगी का फलसफा है ,जब तक सांस है आस है .