जिंदगी कितनी खुबसूरत है ये पूछो दिल से मेरे
लम्हा लम्हा झूमे इन कुदरत के धरती के नजारों पर
कि ठुमक रहे है पाँव देख कर झूमती हुई इन बहारो को
मन में भी उमंगें रह रह कर कर रही है इशारा इन् बाहों को
कि भाग कर गले लगा लू इन झूमती हुई लताओं को
कि खुशबू में भीगा लू अपने आप को मौसम की इन अठखेलियो को
कि चूम लू जी भर कर गुलाब के नए खुबसूरत पंखरियो को
कि वो इशारा कर रही है नई सुबह अपने जवान होने का .
लम्हा लम्हा झूमे इन कुदरत के धरती के नजारों पर
कि ठुमक रहे है पाँव देख कर झूमती हुई इन बहारो को
मन में भी उमंगें रह रह कर कर रही है इशारा इन् बाहों को
कि भाग कर गले लगा लू इन झूमती हुई लताओं को
कि खुशबू में भीगा लू अपने आप को मौसम की इन अठखेलियो को
कि चूम लू जी भर कर गुलाब के नए खुबसूरत पंखरियो को
कि वो इशारा कर रही है नई सुबह अपने जवान होने का .