Sunday, December 25, 2011

raat

रात थी तन्हाई थी और चाँद की गवाई थी
और उसके थरथराते होठ कुछ कहने को व्याकुल थे
पर मेरी निगाहे उसकी झील भरी आँखों में कुछ ढूंड रही थी
शायद बिना होंठ खोले दिल की आवाज़ में कुछ बयां कर रही थी
आकाश में चाँद अपनी राह पर धीरे धीरे खिसक रहा था
पर हमें न कुछ पता की क्या हो रहा है पल पल में
अजीब सा मंजर था उस रात के ख़ामोशी में प्यार का
की न चाहता था शायद वक्त भी कुछ अलग होने को
की चाँद दे रहा था गवाई मुस्करा कर इन खुबसूरत पलो को

vita .

infatti questo vita sia strano ciascuno cosi sua duro al spendo con felice tutto volta ,nonostante noi voglio esso con felice sempre ma quando triste entero nel colpo ,nessuno sa esso tuttavia noi accettere esso per po ,ma esso non esso vada molto presto ,forse esso prento qualche volta piu ,dio sa esso .

Thursday, October 27, 2011

woh

है मुझे आज भी इतबार उस पर
कि वोह आयगी जरुर करने वादा पूरा

कि जी रहा हु में उसकी यादो में हर ख्ह्यर
कि वो पल वो खुशिया ,जीवन के अनमोल वचन

क्योकर में भूलू में उस सुंदर मंजर को
गुजारी थी जिसमे हमने प्यार कि मोहक रातो को

वोह आयगी ,वोह आयगी ,है यकीं इस दिल को हमेशा
कि वादा किया था हमने मिलकर कि न करेंगे रुसवा इक दूजे को

man

वाह वोही  सुहानी तारो भरी  रात पुरे चाँद के खिलने के साथ
वोही चाँद की मदम रोशनी के साथ पुरे चाँद के खिलने के साथ

शांत और खिली हुई रोशनी में वातावरण में अजीब सी दस्तक है
सहसा ही मन में अगिनित ख्याल विचरण करने लगते है

नहीं लगती किसी के पदचिन्हों की महक इस सुने छत पर
क्यों बिखरी है खुशबू चारो और क्या आने को है वो पायल की झुनकार

क्यों याद करता है मन बार बार उसको जो न बन सकी कभी इस दिल के पास
क्यों नहीं मिटा देता मन उन बिसरी हुई सुंदर यादो को ,कि न बन सकी वो सखी इस मन कि

Friday, September 16, 2011

subah

सुबह शब्द अपने आप में अगिनित विचारो का एक पुंज नए दिन की शरुआत में सुंदर सपनों के साथ प्रभात वेला में अनोखी घटा बिखेरे हुए चारो और चिरियो की चय चय में पेढ़ो की हरयाली में सूर्य की लाली की किरण के साथ इस भू पर अपनी छटा भिखेर कर व्यक्ति की जिंदगी में नए ताजगी के साथ दिन की पहल करता हुआ सर्वशक्तिमान को नमन करता हुआ अपने को नया पता है . कुदरत अपने आप में बेमिसाल है ,उस परवरदिगार की रचना है जिसके कण कण में वो समाया हुआ है जिसे देख इंसान बार बार हेरान होता है और उसको नमन करता है और जुबा से अनायास शब्द फूट परते है "वाह" .सुबह सुहानी सुबह में व्यक्ति चल परता है नए दिन की असीम अशाओ के साथ ,अपने सपनों के साथ ,परिवार की खुशियों के लिए ,देश के लिए ,समाज के लिए ,सपनो को पूरा करने के लिए ,यही जिंदगी है यह ही जिंदगी का फलसफा है ,जब तक सांस है आस है .

Monday, August 29, 2011

saans

तुम न जाने किस जहाँ में खो गए
हम भरी दुनिया में तनहा रह गए

मोत भी आती नहीं ,जान भी जाती नहीं
दिल को ये क्या हो गया ,कोही चीज भाती नहीं

सांस भी अटक रही है देखने को तुजे यहाँ
आ जाओ की अब की छोरने को है ये जहाँ

Wednesday, August 10, 2011

diwana mousam

फिर आ गया दीवाना मोसम प्यार का
रग रग में था बरसो से  इंतज़ार जिसका

वैसे तो हर साल आता है यह इस माह
पर ऐसे तो था कही साल जिसका  था इंतज़ार

क्यों थिरक रहे है अंग बार बार ,शायद है वो आने को पास
क्यों शर्मा के झुक जाती है नज़रे बार बार ,कि हो आने को है पास

कि कही साल से बांध के रखा है उनका ख्याल कि हो गई हु में अब जवान
कि नहीं परते है अब मेरे पाँव धरती पर ,उरने को है आकाश


Thursday, July 28, 2011

khushboo pyaar ki

o
खुशबू शब्द अपनेआप में असंख्य माईने छुपाये हुए है ,खुशबू शब्द सुनते ही मन की बांछे खिल जाती है ,खुशबू लब्ज़ में अपना अलग ही मज़ा होता है मन की तरंगे सहसा खिल उठती है ,अंग अंग में ख़ुशी का अहसास उमरने लगता है हां आँखों और कानो में देखने और सुनने की ललक तेज हो जाती है और पल भर का इंतज़ार भी मन सहने के काबिल नहीं रहता ,दिल ख़ुशी में हिलोरे मरने लगता है ,जबान खामोश हो जाती है नैन बेसब्री से त्रस्त हो जाते  है ,मन में एक हुक सी उठती है आखिर क्यों बेचैन है शरीर के सारे अंग ,पर सब और स्वत ही ख़ामोशी कि नहीं मालूम किसी को क्यों है ऐसा .

आखिर इंतज़ार टूटा ,धरकने तेज़ हुई ,निगाहे हेरान होकर निचे समा गई शब्द बाहर आने को सिमट गए ,पल भर में खुशिया बाहों में समा गई कि ये मिलन था बरसो बाद प्यार का लम्बे इंतज़ार का कि वो मेरे थे मेरे अपने थे कि खुशबू थी हमेशा मेरे अंदर अंग अंग में उनके आने कि उनसे मिलन कि काश प्यार कि ये खुशबू हर दिल में हमेशा बनी रहे और जिन्दगो में चार चाँद लगाती रहे तो जीवन का हर पल सार्थक हो जाये खुशियों कि ये खुशबू सब के आंगन और दिलो को खिलाती रहे ऐसी कामना उएह प्रकाश करता है जी भर कर ",जियो और जीने दो "