फिर आ गया दीवाना मोसम प्यार का
रग रग में था बरसो से इंतज़ार जिसका
वैसे तो हर साल आता है यह इस माह
पर ऐसे तो था कही साल जिसका था इंतज़ार
क्यों थिरक रहे है अंग बार बार ,शायद है वो आने को पास
क्यों शर्मा के झुक जाती है नज़रे बार बार ,कि हो आने को है पास
कि कही साल से बांध के रखा है उनका ख्याल कि हो गई हु में अब जवान
कि नहीं परते है अब मेरे पाँव धरती पर ,उरने को है आकाश
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