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खुशबू शब्द अपनेआप में असंख्य माईने छुपाये हुए है ,खुशबू शब्द सुनते ही मन की बांछे खिल जाती है ,खुशबू लब्ज़ में अपना अलग ही मज़ा होता है मन की तरंगे सहसा खिल उठती है ,अंग अंग में ख़ुशी का अहसास उमरने लगता है हां आँखों और कानो में देखने और सुनने की ललक तेज हो जाती है और पल भर का इंतज़ार भी मन सहने के काबिल नहीं रहता ,दिल ख़ुशी में हिलोरे मरने लगता है ,जबान खामोश हो जाती है नैन बेसब्री से त्रस्त हो जाते है ,मन में एक हुक सी उठती है आखिर क्यों बेचैन है शरीर के सारे अंग ,पर सब और स्वत ही ख़ामोशी कि नहीं मालूम किसी को क्यों है ऐसा .
आखिर इंतज़ार टूटा ,धरकने तेज़ हुई ,निगाहे हेरान होकर निचे समा गई शब्द बाहर आने को सिमट गए ,पल भर में खुशिया बाहों में समा गई कि ये मिलन था बरसो बाद प्यार का लम्बे इंतज़ार का कि वो मेरे थे मेरे अपने थे कि खुशबू थी हमेशा मेरे अंदर अंग अंग में उनके आने कि उनसे मिलन कि काश प्यार कि ये खुशबू हर दिल में हमेशा बनी रहे और जिन्दगो में चार चाँद लगाती रहे तो जीवन का हर पल सार्थक हो जाये खुशियों कि ये खुशबू सब के आंगन और दिलो को खिलाती रहे ऐसी कामना उएह प्रकाश करता है जी भर कर ",जियो और जीने दो "
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