ये दुनिया इंसानो की बस्ती है
जहाँ इंसान एक खिलौना है
कहते है यह एक कठपुतली है
जिसकी डोर है कही बहुत दूर
बेशुमार चाहते है इसके दिल में
पर पूरे करने की ताकत है कही और
खूबसूरत दुनिया बनाकर इक मिटटी
का खिलौना भेजा है हमको बनाकर एक खेल करने के लिए
क्या चाहता है वो यह सब देखकर , नहीं मालूम किसी को
वाव रे कुदरत ,वाह रे तेरी खुदाई
जहाँ इंसान एक खिलौना है
कहते है यह एक कठपुतली है
जिसकी डोर है कही बहुत दूर
बेशुमार चाहते है इसके दिल में
पर पूरे करने की ताकत है कही और
खूबसूरत दुनिया बनाकर इक मिटटी
का खिलौना भेजा है हमको बनाकर एक खेल करने के लिए
क्या चाहता है वो यह सब देखकर , नहीं मालूम किसी को
वाव रे कुदरत ,वाह रे तेरी खुदाई
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