Sunday, May 15, 2016

raat

रात   भी अजीब है कुदरत की बनी हुई इस दुनिया में छत पर सोने पर आसमान को निहारने का सम्मा ही अलग प्रकार का होता है तारो के साथ चन्द्रमा का होना आकाश में चार चाँद लगा देता है कभी कोई तारा धम से अपने समूह से गिर कर लुरकता निचे की और तेजी के साथ आता है और फिर लुप्त हो जाता है कब कितना समय गुजर जाता है पता नहीं चलता कब नींद के आगोश में व्यक्ति चला जाता है।
कुदरत का यह खेल निराला सदियों से चला आ रहा है। बचमन में हर बच्चे को ऐसा ही नज़ारा अपनी छत पर नज़र आता है जहाँ वो हर रात को सोने जाता है।
वैसे तो कुदरत की बनाई हर वस्तु अपने आप में अनोखी होती है पर काम की होती है और मजेदार भी
इसलिए किसी ने कहा है कुदरत की बनाई चीज को कभी  छेडना नहीं चाहिए वो अपने आप में घटित हुई है और अपने आप लुप्त हो जाएगी वैसे भी संसार की हर चीज कभी रहने वाली नहीं है सिर्फ ईश्वर के अलावा
ये मानव की सोच अलग है वो समझता है वो यहाँ हमेशा रहने वाला है इसलिए तो धन दौलत इकठी करता है उसको प्राप्त करने में सभ भूल जाता है नाते रिश्तेदारों को दोस्तों को घर के सदस्यों को और कभी लढाई पर आमादा हो जाता है सिर्फ फनी धन के लिए जो न कभी किसी के पास था न रहेगा। लोग सभ चले गए इस दुनिया से चाहे वो रा जे थे चाहे महात्मा चाहे बढ़े तीरंदाज।
सर्वशक्तिमान इस ईश्वर की बनाई इस दुनिया में सब निर्मूल है कोई किसी का कुछः नहीं सब आणि जानी  है
उसको सदैव याद करना चाहिए जिसने हमें यह जिंदगी इस संसार में दी ताकि हम सब प्यार और शांति के साथ अच्छा काम करते रहे जब तक इस संसार में है उसको कोटि कोटि धन्यवाद। 

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